सुपौल
साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किए गए सुपौल जिले के साहित्यकार अरविंद मनीष
अणिमा वत्स, अनु माही की रिपोर्ट
*सुपौल*:- प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी मिथिला क्षेत्र के समृध्द भाषा मैथिली को सर्वोच्च सहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाजा गया। इस बार का साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला है, भारतीय वन सेवा में कार्यरत सुपौल जिले के बसावनपट्टी गाँव निवासी साहित्यकार अरविंद मनीष जी को। उन्हे यह सम्मान उनके मैथिली कवि संग्रह "जिनगीक ओरिआओन करैत" के लिए मिला है।
आपको बता दें कि, बचपन से ही लेखन एवं सहित्य में विशेष रुचि रखने वाले अरविंद मनीष जी सुपौल जिले के राघोपुर प्रखंड के बसावनपट्टी गाँव के निवासी हैं। पूर्व में भी इन्हे यात्री पुरस्कार, किर्ति नारायण मिश्र सहित्य सम्मान एवं त्रिवेणी सहित्य सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है ।
इनका जन्म 15 अक्टूबर 1964 को गाँव में ही हुआ, इनके पिता जीतेन्द्र झा अपने समय के मशहूर अखबार आर्यावर्त के बड़े पत्रकार रह चुके हैं तथा इन्होने अपनी उच्च शिक्षा पटना में ही पूरी की इसके उपरांत देहरादून से ऑनर्स डिप्लोमा इन वाइल्ड लाइफ मैनेजमेंट की शिक्षा पूरी की तथा भारतीय वन सेवा में अपना सेवा देना प्रारंभ किया एवं इनकी पहली पुस्तक हिंदी कविता संग्रह "और कितनी यातनाएं" थी जो कि, वर्ष 1995 में प्रकाशित हुई थी, शुरू से ही सामाजिक कार्यों में इन्हे काफी दिलचस्पी रहा है।


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